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Tuesday, March 13, 2012

दोस्त की बीवी की चुदाई-2

दोस्त की बीवी की चुदाई-2






प्रेषक : मुख़तार

हम दोनों फ़िर 69 की अवस्था में आ गए और मैं उसकी चूत चूसने लगा, वो मेरे लण्ड को फ़िर से चूसने लगी तो कुछ देर के बाद मेरा लण्ड फ़िर से खड़ा हो गया।

मैंने फ़िर उसके दोनो पैरों को फ़ैलाया ओर उसके चूत पर अपना लण्ड रखा तो मेरे लण्ड के सुपारे से उसके चूत ढक गई, मैं उसकी चूत पर अपना लण्ड ऐसे ही रगड़ता रहा तो वो बेचैन होकर बोली- मुख़्तार, प्लीज जल्दी डाल दो मेरी चूत में अपना लण्ड !




फ़िर मैंने उसकी गाण्ड के नीचे एक तकिया लगाया और थोड़ा सा जोर लगाया तो पाया कि चूत तो एकदम कसी थी, ताकत लगा कर लण्ड अन्दर डाला, थोड़ा सा अन्दर जाने के बाद मैंने उसे पकड़ा और एक जोरदार धक्का मारा तो उसकी चूत में मेरा लण्ड सिर्फ 3 इन्च घुस पाया और उसके मुँह से जोर की चीख निकल पड़ी- आ आआ आऐ ईईईईईई मार डाला प्लीज निकालो ! मैं मर जाऊँगी !

पर मैं नहीं रुका और मैंने जोर से 3-4 धक्के मारे और अपना लण्ड 5 इंच तक अन्दर कर दिया।

वो और जोर से चीख पड़ी- आआ आआई ईई माआआआ आन माआअर मुख़्तार ! मेरी चूत फट गई है !

मैं बोला- कोई बात नहीं डार्लिंग !

फ़िर वो बोली- प्लीज निकालो।

उसकी चूत से खून बह रहा था। मैं उसके स्तनों को सहलाने लगा और उसके होंठों को चूमने लगा। थोड़ी देर तक इसी तरह से लेटा रहा और फ़िर धीरे-2 अन्दर-बाहर करना शुरु कर दिया।

कुछ देर बाद वो सामान्य हो गई और मेरा साथ देने लगी, वो अपनी गाण्ड नीचे-ऊपर उचका-2 कर चुदाने लगी और मुस्कुराते हुए बोली- मुझे तो तुमने मार ही डाला था ! तुम्हारा लण्ड तो बहुत ही मोटा और लम्बा है।

फ़िर मैं बोला- अभी पूरा अन्दर नहीं गया है !

और उसे पकड़ कर एक जोरदार धक्का मारा तो वो फ़िर से चीख पड़ी- ऊऊई ई ईई माआआर्रर्र गई ! फाड़ दे मेरी चूत को ! मैं माआअररर्र गई ! मुख़्तार धीरे करो ना !

मैंने कहा- अब पूरा चला गया !

फ़िर मैं अन्दर-बाहर करने लगा तो थोड़ी देर के बाद उसे भी मजा अने लगा और वो भी मेरा साथ देने लगी। थोड़ी देर चोदने के बाद उसका पानी निकल गया। मैंने चोदने को गति बढ़ा दी और फ़िर 20-25 मिनट के बाद मैंने अपना सारा पानी उसकी चूत में डाल दिया।

हम दोनो एक दूसरे को चूमते रहे।

मैं उठा और बाथरूम में जाने लगा तो वो बोली- मुख़्तार, मुझे भी चलो क्यूंकि मैं चल नहीं प़ा रही हूँ।

मैं उसे अपने गोद में उठाकर बाथरूम में ले गया।

उसकी चूत से खून बह रहा था और मेरे लण्ड पर भी खून लगा था। उसने मेरे लंड को साफ़ किया और मैंने उसकी चूत को साफ किया।

हम दोनो फ़िर से बिस्तर पर जाकर लेट गए और थोड़ी देर के बाद वो मुझे चूमने-चाटने लगी और मुझसे कहने लगी- मुख़्तार, मुझे तुम्हारा लण्ड बहुत पसंद आया है और तुम बहुत अच्छे से चोदते हो। यह कह कर वो मेरे लण्ड को प्यार करने लगी और मुँह में लेकर चूसने लगी और फ़िर से हम 69 को अवस्था में हो गये। थोड़ी देर तक मैं उसकी चूत चूसता रहा तो उसने पानी छोड़ दिया।

फ़िर मैंने उसे घोड़ी बना कर चोदना शुरू कर दिया। मैंने एक जोरदार धक्का मारा तो वो जोर से चीखने लगी- निकालो आह आआ आआई इ मार डालोगे क्या? धीरे-2 करो ना !

फ़िर मैं उसके चूचों को सहलाने लगा और फ़िर एक और जोरदार धक्का मारा और पूरा लण्ड अन्दर डाल दिया।

मैं उसे चोदने लगा और फ़िर धीरे-2 वो सामान्य हो गई और मेरा साथ देने लगी।

दस मिनट चोदने के बाद उसका पानी निकल गया लेकिन मैं उसे इसी तरह चोदता रहा।

फ़िर मैंने आसन बदल कर उसे अपने ऊपर ले लिया। वो दोनो पैरों को फ़ैला कर मेरे लण्ड पर बैठ गई और तेजी से धक्के लगाने लगी। वह मेरा पूरा लण्ड अंदर तक ले रही थी।

मैं उसके वक्ष को सहलाने लगा और बोला- कैसा लग रहा है?

तो वो बोली- मुझे जन्नत की सैर करा रहे हैं आप ! ऐसा मज़ा तो मुझे मेरे पति ने कभी नहीं दिया।

सिसकारियाँ भरते हुए बोली- मुख़्तार, मुझे चोद डालो, फाड़ दो मेरी चूत को ! और जोर से चोदो मुझे !

मैं उसे तेजी से चोद रहा था और फ़िर वो झड़ गई। मैं उसे 10-12 मिनट चोदता रहा और फ़िर मेरा पानी निकल गया और मेरे पानी से उसकी पूरी चूत भर गई। हम दोनों थोड़ी देर ऐसे ही नंगे लेटे रहे। रात भर में मैंने उसे 3-4 बार चोदा।

फ़िर सुबह वो उठी तो मुझसे बोली- मुख़्तार, मैं ठीक से चल नहीं पा रही हूँ, मुझे नहाना है।

फ़िर हम दोनों साथ में नहाए। मैंने उसके पूरे बदन पर साबुन लगाया और उसने मेरे बदन पर साबुन लगाया। हम दोनों एक दूसरे को चूमने-चाटने लगे और वो मेरे लण्ड को सहलाने लगी।

मैंने भी जब उसकी चूत को सहलाया तो वह गर्म हो गई और नीचे झुक कर मेरा लण्ड चूसने लगी।

थोड़ी देर चुसवाने के बाद मैंने उसे वहीं बाथरूम में चोदना शुरु कर दिया। 20-25 मिनट चोदने के बाद हम दोनों नहाये और फिर वो नाश्ता बनाने चली गई।

उसने सिर्फ सलवार और ब्रा पहन रखी थी जिसमें वो बहुत ही सेक्सी लग रही थी।

नाश्ते के बाद मैं एक ब्लू फ़िल्म की सीडी लाया और हम दोनों साथ में देखने लगे। मूवी देख कर हम फिर से उत्तेजित हो गए और हमने फिर से एक दूसरे को नंगा किया, फ़रज़ाना मेरे लण्ड को चूसने लगी।

फ़िर मैंने उसे घोड़ी बनाया और उसकी गाण्ड में अपना लण्ड डालने लगा तो उसे बहुत ज्यादा दर्द हो रहा था। वो मुझे मना कर रही थी, चीखने-चिल्लाने लगी, बोली- मुझे नहीं मरवानी गाण्ड।

मैंने उसके चूचों को पकड़ा और जोर जोर से धक्के मारता चला गया और पूरा का पूरा लण्ड डाल दिया।

उसके मुँह से जोर से चीख निकल गई- आ आआ आईआअर मार डाला !

10-12 मिनट के बाद वो मेरा साथ देने लगी। उस दिन मैं दो बजे तक उसकी गाण्ड तीन बार मार चुका था।

फ़िर हम दोनो सो गये ओर शाम को खाना खाने बाहर गए। रात को 8 बजे से हम दोनों नंगे ही लेट गए और बातें करने लगे। वो बोली- तुमने मुझे वो मजा दिया है जिसके सपने मैंने शुरु से देखे थे। आई लव यू मुख़्तार ।

इस तरह मैं उसे 12 दिन तक चोदता रहा। उसके बाद शाहिद आ गया।

उसके बाद जब भी हमें मौका मिलता है, खूब चुदाई करते हैं।



Sunday, March 11, 2012

दोस्त की बीवी की चुदाई-1

दोस्त की बीवी की चुदाई-1



प्रेषक : मुख़तार

मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ। यह मेरी पहली कहानी जो मैं आपको बताने जा रहा हूँ जिसे सुन कर झुके हुए लण्ड फिर से खड़े हो जायेंगे और लड़कियों की चूत से नमकीन सा पसीना बाहर आ जायेगा।

मैं 22 साल का नौजवान हूँ मेरा कद 5 फीट 6 इंच है और मेरा रंग हल्का सा सांवला है। रोज मैं जिम जाता हूँ जिसके कारण मेरा शरीर एक दम गठीला है। मेरा लौड़ा 7 इंच लम्बा और 2.5 इंच मोटा है। मेरे पास वाले फ़्लैट में एक नया परिवार आया है उस परिवार में सिर्फ मियां और बीवी हैं । उनकी शादी अभी हाल ही में हुई है। मैंने अपने फ्लैट के पास इतना फाड़ू माल देखा तो मेरा लौड़ा खड़ा हो गया और मैं अब इस फ़िराक में रहने लगा कि कब मैं इसको चोद पाऊँगा।


मैंने धीरे धीरे शाहिद से दोस्ती बढ़ाई, मेरी उससे बहुत अच्छी पहचान हो गई। वो एक आर्किटेक्ट है और उसकी बीवी का नाम फ़रज़ाना है। मैंने फ़रज़ाना से भी दोस्ती कर ली, इस तरह से मैं उसके घर आने जाने लगा। मैं अकेला रहता था और शाहिद को काम के सिलसिले में 10-15 दिन बाहर ही रहना पड़ता था तो मैंने फ़रज़ाना से भी अच्छी दोस्ती बना ली।

मैं फ़रज़ाना से हंसी मजाक भी करने लगा, फ़रज़ाना बहुत ही अच्छी लड़की है। उसकी उम्र 20 साल से ज्यादा नहीं है और उसका बदन 34-28-36 का होगा, गोरा रंग और गुलाबी होंठ है। फ़रज़ाना बहुत ही सेक्सी लगती है, मैं कभी कभी उसे छू लेता हूँ तो वो बुरा नहीं मानती है।

एक बार फ़रज़ाना ने मुझे शाम को डिनर पर बुलाया, शाहिद 10 दिनो के लिए मुंबई गया था। मैं शाम को करीब 7:30 पर खाना खाने गया तो फ़रज़ाना खाना बना रही थी उसने सलवार और गाऊन पहन रखा था जिसमें उसकी ब्रा और पैंटी नजर आ रही थी। मैंने जिस दिन से उसे देखा था, उसे चोदने के लिया बेक़रार था।

उसने मुझसे बोला- मुख़्तार, अभी बैठो, करीब आधा घण्टा और लगेगा।

मैंने टीवी ऑन किया और मूवी देखने लगा। 25 मिनट तक मूवी देखने के बाद अब मुझे तेजी से भूख लग रही थी। मैंने देखा कि फ़रज़ान अभी तक खाना बना रही है।

फ़िर मैंने उससे पूछा- कोई मदद करूँ?

तो वो मुसकुराते हुए बोली- आज मुझे तुम्हारी मदद की ज्यादा जरुरत है।

फ़िर मैंने पूछा- क्या करना है?

तो मुस्कुराते हुए बोली- बता दूँगी। मैं समझ गया कि आज तो इसका चुदवाने का मन है।

थोड़ी देर के बाद वो खाना लेकर आई ओर बोली- मैं कपड़े बदल कर आती हूँ !

वो जालीदार गाऊन और सलवार पहन कर आई जिसमें वो बहुत ही सेक्सी लग रही थी जैसे कोई परी हो, उसके चूचे ब्रा फाड़कर बाहर आना चाहते थे।

हम दोनों ने खाना शुरू किया और खाते समय मैं उसके वक्ष को तिरछी निगाहों से देख रहा था, उसे भी पता था कि मैं उसके चूचे देख रहा हूँ।

वो थोड़ी से झुक गई तो उसके आधे स्तन दिखने लगे, वो मुस्कुराते हुए बोली- ऐसे क्या देख रहे हो?

तो मैं बोला- कुछ भी नहीं !

फिर वो बोली- मैं सब जानती हूँ !

और फ़िर मुस्कुराने लगी। हम दोनों ने खाना खाया और फ़िर मैं बोला- मैं अब घर जा रहा हूँ !

तो वो बोली- आज यहीं सो जाओ ! मुझे अकेले डर लगता है, आज शाहिद भी नहीं है, यहीं सो जाओ ना?

मैंने कहा- ठीक है ! लेकिन मैं कहाँ सोऊँगा?

तो वो बोली- तुम बेड पर सो जाओ।

मैं बोला- ठीक है !

हम दोनों 11 बजे तक मूवी देखते रहे और बातें करते रहे। फ़िर मुझे पता नहीं चला कि कब मुझे नींद आ गई और रात को जब मैं बाथरूम जाने के लिए उठा तो देखा कि फ़रज़ाना भी मेरे साथ ही सो गई है। यह देखते ही मेरा लण्ड खड़ा हो गया, मैंने सोचा कि आज तो इसे चोद कर ही रहूँगा।

मैं बथरूम से आने के बाद लेट गया और एक हाथ उसके वक्ष पर रख दिया। वो सो रही थी, मैं उसके चूचे सहलाने लगा। फ़िर भी वो नहीं जगी तो मैं उसकी जांघों को सहलाने लगा तो वो जग गई और उसने देख लिया।

मैं चुपचाप सोने का नाटक करने लगा तो वो कुछ नहीं बोली और फ़िर सो गई।

थोड़ी देर के बाद उसने मेरे लण्ड पर अपना हाथ रख दिया और सहलाने लगी। मैं ऐसे ही लेटा रहा तो उसे लगा कि मैं सो गया हूँ।

अब मैं अपने आप को रोक नहीं पाया और उसे अपने बाँहों में ले लिया ओर उसके गुलाबी होंठो को चूमने लगा। वो भी मेरा साथ देने लगी और थोड़ी देर के बाद वो बोली- मुझे तुमसे प्यार हो गया है। हम दोनों एक दूसरे को चूमते रहे और उसने मेरे सारे कपड़े उतार दिए। मैं सिर्फ अंडरवीयर में था। फ़िर मैंने भी उसे पूरी नंगी कर दिया। बल्ब की रोशनी में उसका गोरा बदन बिलकुल चाँद की तरह चमक रहा था। उसने मेरे लण्ड को हाथ में लेकर बोला- तुम्हार लण्ड तो बहुत मोटा-चौड़ा है, शाहिद का लण्ड तो तुम्हारे से आधा है, वो मुझे कभी भी संतुष्ट नहीं कर पाया। मुख़्तार, आज तुम मेरी प्यास बुझा दो !

उसने मेरा लण्ड पकड़ लिया और प्यार करने लगी। मैंने भी उसके दोनों चूचे पकड़ लिए, चूसने लगा और प्यार करने लगा। हम दोनों बिल्कुल मदहोश हुए जा रहे थे। उसके वक्ष का आकार 34 है। एक स्तन मेरे मुँह में था और एक मेरे हाथ में था।

वो मेरे लण्ड को सहला रही थी, करीब हम एक घंटे तक चूमा-चाटी करते रहे। उसने मेरा पूरा बदन चूमा। फ़िर मैंने भी उसके पूरे बदन को चूमा और मैंने उसके दोनों पैरों को फैलाया और उसकी चूत को चूसने लगा। उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था।

मैंने उसकी चूत को चूम-चूम कर गुलाबी कर दिया, वो बोलने लगी- प्लीज मुख़्तार ! जल्दी करो ! अब और नहीं रहा जाता।


फ़िर मैंने कहा- तुम भी एक बार मेरे लण्ड को पिओ !

तो वो बोली- मैंने कभी आज तक लण्ड मुँह में नहीं लिया है !

मैंने कहा- तो मेरा ले लो !

उत्तेजनावश उसने मेरे लण्ड को मुँह में ले लिया। धीरे-2 उसे भी मज़ा आने लगा और वो तो पूरे जोश-ओ-खरोश से मेरे लण्ड चूसने-चाटने लगी।

थोड़ी देर के बाद मैंने अपना सारा माल उसके मुँह में निकाल दिया तो वो पूरा का पूरा माल पी गई और फ़िर मुस्कुराते हुए बोली- मुझे तुम्हारा माल बहुत ही अच्छा लगा।

कहानी जारी रहेगी...

ahmad09mukhtar@gmail.com





Friday, March 2, 2012

गीता भाभी की चुदाई











गीता भाभी की चुदाई

प्रेषक : वैभव जोशी

मैं मुंबई के एक उपनगर डोम्बीवली का रहने वाला हूँ, मेरी उम्र २३ साल है। मेरा कद 5'6", रंग सांवला और बदन कसरत की वजह से अच्छा कसा हुआ है, मेरा लण्ड 8 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा है।

यह मेरी पहली और सच्ची कहानी है।

जब मैं बीस साल का था और बी कॉम के आखिरी साल की पढ़ाई कर रहा था।

यह कहानी एक गुजराती भाभी की है जो मेरी ही बिल्डिंग में हमारे नीचे वाली मंजिल पर रहती थी। उसका नाम लीना है वो अपने परिवार के साथ दो साल पहले ही आई थी। उसके परिवार में वो, उसके पति और दो साल का बेटा थे। उसके पति कपड़े के व्यापारी थे। भाभी दिखने में एकदम क़यामत थी उनकी उम्र तब 27 -28 साल की होगी। वो बदनसे एकदम भरी हुई थी, उनकी फीगर 38-28-38 की होगी और जब वो चलती थी तब उनके दोनों कूल्हे ऐसे हिलते थे कि देखकर तो कोई भी अपने होश खो बैठे।

उनके परिवार और मेरे परिवार में अच्छा मेलजोल था और हमारे परिवार एक साथ कई बार खाना खाने और पिकनिक पर जा चुके थे।

मैं तो मन ही मन उन्हें चोदने के सपने देखता रहता था पर मुझे कोई मौका नहीं मिल पा रहा था। पर एक दिन भगवान ने मेरी सुन ली और भाभी के पति को बिज़नस के सिलसिले में आठ दिन के लिए गुजरात जाना पड़ा।

जाने से पहले दिन भाभी के पति ने मेरे पिताजी को पूछा- अगर आपको कोई दिक्कत न हो तो वैभव को मेरे घर सोने के लिए भेज दें !

अच्छे सम्बन्ध होने के कारण पिताजी ने भी हाँ कर दी। जब मुझे यह बात पता चली तो मैं मन ही मन भाभी को चोदने के सपने देखने लगा।

पहले दिन जब मैं भाभी के घर सोने गया तब भाभी खाना खा रही थी और उनका बेटा सो चुका था। भाभी ने गुलाबी रंग का नाइट गाऊन पहन रखा था, क्या मस्त दिख रही थी वो ! गाऊन में उनके चूतड़ और चूचे इतने अच्छे दिख रहे थे कि देखते ही मेरे लौड़े ने सलामी दे दी।

पर मैं चुपचाप जाकर भाभी के सामने वाली कुर्सी पर बैठ गया।

भाभी ने पूछा- क्यों वैभव? खाना खा लिया?

तो मैंने कहा- जी खा लिया !

फ़िर इधर उधर की बातें करके हम सो गए। भाभी अपने बेडरूम में और मैं हाल में सो गया। उस रात मैंने भाभी को सोचकर मुठ मार ली और कुछ नहीं कर सका।

दूसरी रात भी कुछ नहीं हुआ पर मैंने तो मन में ठान ली थी कि मैं भाभी को चोद कर रहूँगा।

जब तीसरे दिन मैं भाभी के घर सोने गया तब मैंने पहले से ही एक ब्लू फिल्म की डीवीडी अपने एक दोस्त से ले ली थी। जब मैं उनके घर गया तब भाभी खाना खा चुकी थी और अपने बालों में नारीयल का तेल लगा रही थी।

मुझे देखा तो बोली- आओ वैभव, खाना हो गया?

तो मैंने कहा- जी भाभी !

फ़िर भाभी ने कहा- आओ मैं तुम्हारे बालों में भी थोड़ा तेल लगाकर मसाज़ कर देती हूँ।

तो मैंने भी हाँ कर दी, इसी बहाने से भाभी को छूने का मौका मिल गया।

भाभी मेरे बालों में तेल लगा रही थी तो मैंने भी उन्हें तीन चार बार छू लिया। इस वजह से मेरे छोटे नवाब खड़े हो गए और बरमूडा पहने होने की वजह से उसका उभार दिखने लगा था।

एक दो बार भाभी की नजर भी उस पर पड़ गई। फ़िर भाभी ने कहा- अब चाहो तो तुम सो जाओ !

मैंने कहा- नहीं भाभी, कल रविवार है तो मैं थोड़ी देर टीवी देखूँगा। फ़िर सो जाऊँगा। आप सो जाओ।

भाभी बेडरूम में सोने चली गई और मैंने टीवी चला लिया। आधे घंटे के बाद जब मैंने देखा कि भाभी गहरी नींद में सो रही हैं मैंने ब्लू फिल्म की डीवीडी प्लयेर में डालकर चालू कर दी। उसमें अच्छा दृश्य चल रहा था और मैं भी अपना लण्ड निकाल कर हिला रहा था।

अचानक मुझे कुछ हलचल महसूस हुई तो मैंने पीछे मुड़कर देखा कि भाभी खड़ी हैं और वो भी ब्लू फिल्म देख रही हैं।

तो मैं डर गया और टीवी बन्द कर दिया और भाभी के सामने गर्दन झुकाए खड़ा हो गया।

भाभी ने पूछा- वैभव, यह क्या देख रहे थे?

तो मैंने कहा- कुछ नहीं भाभी, मेरे एक दोस्त ने एक पिक्चर की डीवीडी मुझे दी थी, मुझे नहीं मालूम था कि इसमें यह सब है।

इस पर भाभी सिर्फ मुस्कुराई और कहा- झूठ मत बोलो वैभव ! जब मैं तुम्हारे बालों में तेल लगा रही थी तो मैंने भी देखा था तुम्हारे बरमूडा का तम्बू हो गया है।

और फ़िर पूछा- यह सब सिर्फ देखते ही हो या कुछ किया भी है?

तो मैंने झूठ ही कहा- नहीं भाभी, मैंने कभी ऐसा नहीं किया।

असल में मैं तो कई बार चोद चुका था।

भाभी ने कहा- चलो मेरे साथ मेरे कमरे में ! मैं तुझे आज सब सिखाती हूँ।

फ़िर क्या था ! मुझे तो इसी का इंतजार था ! मेरी तमन्ना आज पूरी होने वाली थी। मैं भाभी के पीछे उनके बेडरूम में चला गया।

जैसे ही भाभी बेड पर लेटी, मैं उन पर चढ़ गया और उनके होंटों को चूसना चालू कर दिया।

भाभी की सांसें तेज़ हो रही थी और मैं एक हाथ से उनके चूचों को मसल रहा था। उन्होंने तो ब्रा भी नहीं पहनी थी।

भाभी ने कहा- वैभव, मेरे संतरों की जरा तेल से मालिश कर दो !

तो मैंने ड्रेससिंग टेबल से तेल की शीशी ली और उनके बड़े बड़े दो संतरे गाऊन से आज़ाद कर दिए।

क्या क़यामत के गोरे और बड़े थे उनके चूचे ! और चुचूक तो एकदम गुलाबी और मोटे हो गए थे।

मैंने थोड़ा तेल उन पर डाला और जोर जोर से मसलने लगा। भाभी भी अब गर्म हो गई थी और मेरे लण्ड को अपने हाथ से सहला रही थी।

फ़िर भाभी ने कहा- चूस लो मेरे इन आमों को !

और मैं भी एक बच्चे की तरह उनके चुचूक चूसने लगा। मैं एक हाथ से उनका दूसरा चुचूक निचोड़ रहा था और दूसरे हाथ से उनकी पैंटी मैंने उतार दी और उनकी चूत में ऊँगली करने लगा।

अब भाभी आह्ह्हह्हाह्ह आह्ह्हा ओहोहोह स्स्सस जैसे जोर जोर से सिसकारियाँ भरने लगी। मैंने भी अपने पूरे कपड़े उतार दिए और पूरा नंगा होकर उनसे लिपट गया। वो मेरे लंड को हाथ में पकड़ कर जोर जोर से हिलाने लगी।

फ़िर मैं भाभी पर उल्टा चढ़ गया और हम 69 की अवस्था में आ गए, मैं भाभी की चूत चाटने लगा तो भाभी की सिसकारियाँ और बढ़ गई, भाभी चिल्लाने लगी- और जोर से चाटो वैभव ! आह्हह्हाह्ह आह्ह्हा ओहोहोहोह स्सस बहुत मजा आ रहा है वैभव ! मेरे राजा और जोर से चूसो मेरी चूत को।

फ़िर भाभी मेरे लण्ड को जीभ से चाटने लगी और फ़िर लोलीपोप की तरह उसे चूसने और अन्दर-बाहर करने लगी। मैं तो मानो तब स्वर्ग में था।

मैं भी जोश में आ गया था और उनकी चूत को जोर जोर से चूसने लगा था, बीच बीच में उनके दाने को भी काट रहा था। अब भाभी से रहा नहीं जा रहा था और वो जोर जोर से अपने चूतड़ हिला रही थी और बोल रही थी- कम ऑन वैभव, फक मी ! ओ या ...ओ य़ा....ओ यहा.....ओह होहोह स्सस्सस्सस ! कम ओन वैभव ! और जोर से चाटो इसे ! आःह्हा ऊऊह्ह्हू स्सस्स

और मेरे लण्ड को जोर जोर से चूस रही थी।

तब मैंने कहा- ओ ओ ओ भाभी, मैं झड़ने वाला हूँ।

तो भाभी बोली- मैं भी झड़ने वाली हूँ !

और हम दोनों एक दूसरे के मुँह में झड़ गए। भाभी ने मेरा सारा माल निगल लिया और मैं भी भाभी का सारा रस चाट गया।

थोड़ी देर हम ऐसे ही एक दूसरे पर लेटे रहे। दस मिनट बाद भाभी फिर से मेरा लण्ड चूसने लगी और मैं भाभी के चूचे सहलाने लगा।

हम फ़िर से गर्म हो गए, मेरा लण्ड तन कर आठ इंच का हो गया।

भाभी ने कहा- वैभव, अब रहा नहीं जा रहा ! जल्दी से मेरी चूत में अपना लण्ड डालो।

मैंने अपने लण्ड का सुपारा उसकी चूत के छेद पर रख दिया और एक जोर का झटका मारा तो लंड तीन इंच तक ही अंदर गया था कि भाभी जोर से चिल्लाई- हाय मार डाला मुझे ! वैभव, अपना लण्ड बाहर निकालो ! मुझे बहुत दर्द हो रहा है, मैं मर जाऊँगी।

तो मैं भी डर गया, अपना लौड़ा बाहर निकल लिया और भाभी से कहा- तुम क्या पहली बार चुदवा रही हो जो तुम्हें दर्द हो रहा है?

भाभी बोली- अरे नहीं, मैं तो मेरे पति से चुदवाती हूँ पर उनका इतना बड़ा और मोटा नहीं है।

फ़िर मैंने थोड़ा सा नारीयल तेल उसकी चूत में डाल दिया और ऊँगली से अन्दर लगा दिया और थोड़ा अपने लण्ड पर भी मल लिया।

उसकी टांगों को अच्छी तरह फैला कर अपना लण्ड उसकी चूत पर रख दिया और एक जोर का झटका लगाया तो मेरा लंड चार इंच तक अन्दर घुस गया और भाभी जोर जोर से चिल्लाने लगी- ओ नो वैभव ! बाहर निकालो ! जल्दी ! मुझे दर्द हो रहा है।

थोड़ी देर हम ऐसे ही पड़े रहे। जब पाँच मिनट बाद उसका दर्द कुछ कम हुआ तो मैंने और एक झटका लगाया तो मेरा पूरा का पूरा लंड अन्दर चला गया। भाभी के चिल्लाने से पहले ही मैंने उसके होंटों पर अपने होंट रख दिये।

जब धीरे धीरे उसका दर्द कम हुआ तो उसे भी मजा आने लगा और वो अपने चूतड़ उठा उठा कर मेरा साथ देने लगी, मैंने भी धक्के लगाना चालू कर दिए।

अब उसे भी मजा आने लगा था तो मैंने अपने गति बढ़ा दी। फ़िर से भाभी आहें भरने लगी और सिसकारियाँ तेज़ होने लगी, वो बोल रही थी- ओ वैभव ! कम ओन...फक मी बास्टर्ड...ऊऊह्ह्ह्ह.... आआअ......ह्ह्ह.... अहहहः ..... स्स्स्स्स् ......मादरचोद...चोद दे मुझे !





और गालियाँ सुनते ही मैं पूरे जोश में आ गया और जोर जोर से चोदने लगा। अब मैं भी चालू हो गया, मैं बोला- ले मेरी रण्डी... ले मेरा लवड़ा खा जा... ले और जोर से ले... ले तेरे माँ की चूत...

और मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी, पूरे कमरे में सिर्फ गालियों की और फक फक फक और फच फच की आवाजें आ रही थी।

भाभी ने अपने दोनों टांगों से मुझे कस कर पकड़ रखा था और भाभी पूरे जोश में थी, बोल रही थी- भेनचोद और जोर से चोद मुझे... फाड़ दे मेरी चूत को... आआअ..... स्स्सस अहहः......अहहहः .....ओहोहोह..... ले... ले माँ के लवडे... भोसड़ा बना दे मेरी चूत को... आज से गीता तुम्हारी है... जब चाहे इसे चोदना तू।

अब भाभी चरमसीमा पर थी, वो अपने चूतड़ जोर जोर से हिला रही थी, अब भाभी बोली- वैभव, पूरी ताकत से चोद मुझे ! मैं आने वाली हूँ !

मैं भी पूरी तेजी से उसे चोदे जा रहा था। भाभी का शरीर अब अकड़ने लगा था, उसने मुझे कस कर पकड़ा और ह्ह्ह्हह.... अह्हहहः .......ह्ह्ह.... अह्हहः ......स्सस्सस करते हुवे वो झड़ गई।

पर मैं अब तक नहीं झड़ा था, अब मैं कहाँ रुकने वाला था, मैं शॉट पे शॉट मारता गया और लगभग दस मिनट के बाद मैं झड़ने वाला था तो भाभी से कहा- मैं आ रहा हूँ, मैं अपना लवड़ा बाहर निकाल लूँ?

तो भाभी बोली- नहीं पूरा माल अंदर ही डाल दे ! मैंने गोली ले ली है !

फ़िर क्या था, मैंने ऐसे जोर के धक्के लगाये कि भाभी भी चरमरा उठी और उसकी चूत मैंने अपने वीर्य से भर दी। फ़िर थोड़ी देर तक मैं उस पर ही लेटा रहा।

बाद में हमने बाथरूम जाकर एक दूसरे को साफ किया और फिर से बिस्तर पर आ गए।

उस रात मैंने भाभी को दो बार और चोदा, एक बार घोड़ी बना कर और एक बार उनकी गाण्ड भी मारी।

यह कहानी मैं बाद में बताऊँगा। फ़िर दो सालों तक मैं भाभी को इसी तरह चोदता रहा, उसके बाद भाभी का परीवार यहाँ से गुजरात में शिफ्ट हो गया।

अब हम एक दूसरे को नहीं मिल पाते पर आज भी भाभी की बहुत याद आती है।

दोस्तो, यह थी मेरी कहानी ! आपको कैसी लगी मुझे ज़रूर बताना। मेरा ईमेल है :

jojo19801980@yahoo.com




Monday, February 27, 2012

लड़की से औरत बनी







लड़की से औरत बनी

प्रेषिका : पूनम बंसल

मेरा नाम पूनम है, मैं पंजाब की रहने वाली हूँ, मेरे पापा चंडीगढ़ में सरकारी अफसर हैं और मम्मी घरेलू महिला हैं।

बात उस समय की है जब मैं इंजीनियरिंग फ़ाइनल इयर की छात्रा थी, मेरी उम्र 20 साल की थी, तब तक मैं पूर्ण रूप से कुँवारी थी लेकिन सहेलियों से सेक्स की बातें सुन कर मेरे मन में भी चुदवाने की इच्छा होती थी लेकिन नारी सुलभ लज्जा आड़े आ जाती थी।

कभी कभी सुबह सुबह ट्रेन की सफ़र करती तो पटरियों पर लैट्रिन के लिए बैठे लोगों के लिंगों को चोर नज़रों से देखती थी !




मेरे घर के सामने एक 30 साल का आदमी रहता था जिसका नाम रमेश था। उसकी बीवी पारिवारिक कारणों से उसके माँ बाप के साथ गावं में रहती थी। वो रविवार की छुट्टी में गाँव चला जाता था। चूंकि वो अकेला रहता था इसलिए अक्सर हमारे घर आ जाता था, मम्मी पापा से काफी घुलमिल गया था !

एक बार मम्मी पापा एक रिश्तेदार की शादी में दो दिनों के लिए शहर से बाहर गए थे, मेरी जरूरी क्लास थी तो मैं अकेली घर पर रह गई।

शाम को कालेज से वापस आकर कपडे बदले और चाय बना कर टीवी देखने बैठ गई, एक इंग्लिश मूवी आ रही थी जिसमे काफी सेक्सी सीन थे, जिन्हें देख कर मैं गर्म होने लगी और अपना हाथ लोअर में डाल कर चूत सहलाने लगी।

तभी दरवाज़े की घण्टी बजी, दरवाज़ा खोला तो रमेश सामने था।

मैंने उसे अंदर बुला लिया और हम दोनों मूवी देखने लगे। थोड़ी देर बाद उसने मेरी जांघ पर हाथ रख दिया तो मैंने उसका हाथ हटा दिया। थोड़ी देर बाद जब दुबारा हाथ रखा तो मैं उसका हाथ न हटा सकी फिर वह मुझे अपनी तरफ खीच कर मेरे होठ चूसने लगा और मेरे मम्मे पकड़ कर सहलाने लगा।

मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।

उसने मेरी टी शर्ट में हाथ डाल कर मम्मे को ब्रा के अंदर से पकड़ कर बाहर कर दिया। मैंने उसे दरवाजा बंद करने को कहा।

वो दरवाजा बंद करके आया और मुझे उठा कर मम्मी पापा के बेडरूम में ले गया।

पहले मेरे लोअर और टीशर्ट निकल दिया और खुद नंगा हो गया। उसका लण्ड मोटे डंडे की तरह खड़ा था जिसे देख कर मैं सिहर गई की मेरी छोटी सी चूत उसे कैसे अपने अन्दर लेगी।

मेरे इस डर से अन्जान उसने मेरे साथ बेड पर लेट कर मेरी 32 इंच के संतरों को ब्रा से आजाद कर दिया और एक चुचूक मुँह से चूसने लगा तो दूसरे को मसलने लगा। उसका एक हाथ मेरी पैंटी में घुस कर चूत को सहला रहा था, कभी चूत, कभी झांटे तो कभी चूतड़ों को सहलाता।

वह करीब 10 मिनट ऐसे ही मुझे मसलता रहा। उसके बाद वो मेरी चूत चाटने लगा।

दोस्तो, मैं क्या बताऊँ कि कितना मज़ा मैं लूट रही थी !

करीब 15 मिनट तक अपनी चूत चटवाने के बाद मुझे लगा कि जैसे मेरा सारा शरीर पिंघल रहा है, मैं अकड़ने लगी और जैसे चूत से कुछ निकल रहा था।

और वो जीभ अंदर डाल डाल कर सारा रस पी गया।

मैं निढाल सी होकर पड़ी रही, वो फिर भी मेरी चूत चाटता रहा।

थोड़ी देर बाद मैं फिर गर्म होने लगी। फिर वो मेरे ऊपर इस प्रकार उल्टा लेट गया कि उसका लण्ड मेरे मुँह में और मेरी चूत उसके मुँह पर !

मैंने लण्ड को चाटने की कोशिश कि लेकिन अजीब सा कसैला स्वाद था और मैंने नहीं चाटा। लेकिन हाथ से सहलाती रही।

इस अवस्था में हम 5 मिनट रहे होंगे।

इसके बाद वह मेरी दोनों टाँगे फैला कर उनके बीच में आ गया। अब मेरी चूत उसके लण्ड के सामने थी।

पहले तो वह लण्ड का सुपारा मेरी चूत के मुँह पर रगड़ता रहा, मुझे बहुत मज़ा आ रहा था और मैं चूतड उचका उचका कर मज़ा ले रही थी, फ़िर उसने मेरी कमर पकड़ ली और एक तेज़ झटका मारा तो लण्ड मेरी चूत को फाड़ता हुआ अन्दर घुसा।

एक तेज़ चीख मेरे मुँह से और गाण्ड से तेज़ पुर्र्र की आवाज निकल गई।

मुझे लगा कि मेरी चूत में किसी ने चाकू घुसा दिया हो ! मैं तड़प उठी लेकिन उसके पकड़ से अपने आप छुड़ा न सकी। एक शेर की तरह उसने मुझे जकड़े रखा।

जब मुझे थोड़ा आराम मिला तो वह मेरे मम्मे चूसने लगा। धीरे धीरे मुझे मज़ा आने लगा और वो लण्ड को आगे-पीछे करने लगा।

उसने एक तेज़ झटका और मारा, दर्द तो इस बार भी हुआ लेकिन बहुत कम ! हल्की सी चीख भी निकली, पूरा लण्ड चूत में घुस गया था क्योंकि अब हमारी झांटे आपस में छू कर रही थी।

अब उसने पूरे जोर-शोर से मेरी चुदाई शुरु कर दी, लण्ड को पूरा आगे पीछे कर करके झटके मारता तो कई बार चीख निकल जाती तो कई बार पाद !जम के चुदाई हो रही थी !

मैंने हाथ से छू कर चूत की स्थिति जाननी चाही तो मेरी प्यारी सी चूत नीचे गाण्ड तक फैली हुई थी, दोनों लब मुश्किल से लण्ड को संभाले हुए थे।

खैर मज़ा तो बहुत आ रहा था, करीब 25 मिनट की धक्कमपेल चुदाई के बाद मैं झड़ने लगी, मेरे मुहँ से आः आह चोदो जान आःह्ह्ह आई की आवाज़ें निकलने लगी।

मैंने क़स लिया उसे अपनी बाहों में और ढीली पड़ने लगी।

लेकिन वो पूरे जोश में मुझे चोदता रहा और मेरे अंदर ही झड़ गया। उसके वीर्य से मेरी चूत लबालब भर गई। वो मेरे उपर तब तक पड़ा रहा जब तक उसका लण्ड खुद बाहर न निकल गया।

हम दोनों उठे तो देखा कि चादर पर खून और वीर्य का बड़ा सा धब्बा लगा हुआ है।

मैं अब लड़की से औरत बन चुकी थी !

बाथरूम में जा कर सू सू किया तो योनि से वीर्य के साथ हल्का सा खून भी आ रहा था !

दोस्तो, यह थी मेरी लड़की से औरत बनने की दास्तान !

अगली पूरी रात क्या हुआ ?

आप लोगों के जबाब मिलने के बाद लिखूंगी।

आप सबकी दोस्त

poonambansal9@gmail.com





Saturday, February 25, 2012

कुंवारा लण्ड

कुंवारा लण्ड






कुंवारा लण्ड

प्रेषक : नीरव

यह कहानी मैं श्रीमती नेहा वर्मा के माध्यम से अन्तर्वासना को भेज रहा हूँ।

मेरा नाम नीरव है, मैं 5 फ़ुट 8 इन्च लम्बा हूँ, मेरी उम्र 21 साल है, मैं भरुच, गुजरात का रहने वाला हूँ। मैं बहुत सालों से अन्तर्वासना पढ़ रहा हूँ। मुझे सेक्स की काहानियाँ पढ़ना और फिर मुठ्ठ मारना बहुत अच्छा लगता है। लेकिन मेरा नसीब बहुत खराब है, गुजरात में रह कर भी मुझे कोई भी लड़की लिफ़्ट नहीं देती है। मैं ऐसा नहीं है कि अच्छा नहीं दिखता हूँ, पर मैं स्वभाव से बहुत शर्मीला लड़का हूँ। इसी वजह से मैं आज तक किसी भी लड़की के सम्पर्क में नहीं आ सका और ना ही कभी मैंने चुदाई का आनन्द लिया। मेरा लण्ड अभी तक कुंवारा ही है … सच कहता हूँ, मैंने आज तक किसी भी चूत के दर्शन तक नहीं किये। पर यह जरूर कह सकता हूँ कि दुनिया की किसी भी लड़की या महिला को मैं भरपूर यौन सुख दे सकता हूँ और उसे पूर्ण सन्तुष्टि दूंगा, उसका वफ़ादार बना रहूंगा, बदनामी कोई नहीं चाहता है, फिर मैं तो एक बहुत शालीन उच्च परिवार का सभ्य लड़का हूँ, पढ़ा लिखा और समझदार लड़का हूँ।

मैं आपको एक सच्ची घटना बताता हूँ। उस दिन मेरे लण्ड का कुंवारापन टूटने ही वाला था पर हाय री किस्मत … नहीं टूटा। मेरा दिल टूट गया, मैं तड़प उठा। मेरी आंखो में आंसू तक आ गये।

मुझे बड़ी चूचियों वाली लड़की, पतली कमर और बड़ी गाण्ड वाली लड़की बहुत सेक्सी लगती है। बस मेरा दिल उसे चोदने को करने लगता है। ऐसी ही एक सेक्सी लड़की मेरी पड़ोस में रहती थी। उसका नाम रेशमा था। वो मुझे बहुत ही सुन्दर लगती थी। उसका फ़िगर 36-34-36 था। मेरी उसके साथ बहुत अच्छी दोस्ती थी। वो मुझे अच्छी भी लगती थी। उसके नाम की मैं मुठ्ठ भी मारा करता था। उसे चोदने के सपने मैं रातों को देखा करता था। मैं उसे चोदने का मौका भी ढूंढता रहता था। पर या तो मुझे मौका मिलता नहीं था या हो सकता है कि वो मुझे ऐसा मौका देना ही नहीं चाहती थी। वो जितना मुझसे दूर रहने की कोशिश करती थी, उसमें मुझे और अधिक कशिश लगने लगती थी, वो और भी अधिक सुन्दर और सेक्सी लगने थी। मन ही मन में मैं तड़प उठता था।

एक दिन उसने मुझे मोबाइल पर कहा- आज दिन भर के लिये मेरे घर वाले पास के गांव को जाने वाले हैं, वे लोग शाम तक आयेंगे, यदि आपके पास समय हो तो यहीं आ जाओ, बातें करेंगे।

मैं उसके घर चला गया। वो उस दिन एकदम अकेली थी। मैं जानता था कि वो मुझे पसन्द करती थी। उसने मुझे बेडरूम में बुला लिया था, वहाँ रेशमा कोई अपना काम कर रही थी। उसने मुझे वही बिस्तर पर बैठने को कहा। काम करके वो मेरे पास बिस्तर पर आकर बैठ गई। हम दोनों बहुत पास में बैठे थे। हम दोनों खूब हंस हंस कर बाते कर रहे थे कि अचानक हंसी हंसी में उसने मेरी जांघ पर हाथ दे मारा। मेरा शरीर एक दम से झनझना सा गया। फिर मैंने भी एक बार उसकी कोमल और चिकनी जांघों पर हाथ मारा तो वो कुछ नहीं बोली, उल्टे ही वो और चहकने लगी। बातों ही बातों में उसने मुझे अपनी बाहों में जकड़ लिया और मेरे गाल पर एक चुम्मा भी ले लिया। फिर वो अचानक से शरमा गई। मैंने जल्दी से उसका चेहरा अपने हाथों में लिया और उसके होंठ चूम लिये। उसने कोई विरोध नहीं किया बल्कि उसने भी प्रतिउत्तर में मेरे होंठ से अपने होंठ चिपका लिये। मुझे इस तरह से यह चुम्बन करना बहुत अच्छा लगा था। फिर हम दोनों नशे की सी हालत में लगभग 15 मिनट तक एक दूसरे को चूमते रहे।

पर इस मदहोशी के आलम में मेरा लण्ड बेकाबू होने लगा। उसने धीरे से शरमा कर मेरा लण्ड पकड़ लिया और फिर उसके मुख से आह निकल पड़ी। मैंने रेशमा को और पास चिपका लिया और धीरे धीरे उसे बिस्तर पर लेटा कर उसके ऊपर चढ़ गया। मैं उसके होंठो को चूमते हुये उसके निचले भाग की तरफ़ बढने लगा। पहले गले पर, फिर और … और भी नीचे और फिर उसकी उभरी हुई छाती पर।

उसकी सांसें तेज हो उठी, उसकी छाती तेजी से ऊपर नीचे होने लगी थी। उसकी बड़ी बड़ी चूचियों को मैं एक बार तो देखता ही रह गया फिर हौले से उसे दबा दिया, फिर उसकी पूरी चूचियों पर हाथ फ़िरा फ़िरा कर उसे दबाने लगा। उसके मुख से आनन्द भरी सिसकारियाँ निकलने लगी।

उसे बहुत अच्छा लग रहा था। अब वो मेरे सर को पकड़ कर अपनी चूचियों पर दबाने लगी। अब मैं ब्लाऊज़ से नीचे उसकी नाभि पर आ गया। उसमे मैंने अपनी जीभ नाभी में डाल कर घुमाई। वो अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह कर उठी। फिर मैं उसकी साड़ी को खिसकाते हुये उसकी चूत की तरफ़ बढ चला। साड़ी के ऊपर से ही मैंने उसकी चूत को चूमा। उसके मुख से उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ की आवाज निकल गई।

मैं उसकी जांघें दबा कर उसकी चूत को चूमने लगा। फिर मैंने जल्दी से उसकी साड़ी और पेटीकोट उलट कर कमर पर डाल दिया। उसे नीचे से नंगी कर दिया। वो सिमट सी गई। उसकी नंगी चूत के बीच मेरा सर दब गया, पर जीभ उसकी चूत तक पहुँच ही गई थी। वो तड़प उठी।

मैंने उसकी मदद से उसकी साड़ी और पेटीकोट उतार दिया था। उसकी चूत पर छोटे छोटे नरम बाल थे। मेरे उसकी चूत चूमने से वो पागल सी हो उठी थी, और बार बार वो अपनी चूत चुदाई के अन्दाज में उछाल रही थी। उसकी चूत की महक से मैं मदहोश हो चुका था। बस उसकी चूत जोर जोर से चूसने लगा था। उसने भी मेरा कड़क लण्ड पकड़ कर जोर जोर से दबाना और मुठ्ठ मारना शुरू कर दिया था।

मैं अपने होश खो बैठा। उसके मुख में मैंने अपना लौड़ा घुसेड़ दिया और उसे धक्के मारने लगा। वो मुझे बार बार हटाती रही फिर उसने मुझे पकड़ कर जोर से अपने ऊपर लेकर चिपटा लिया और अपनी दोनों टांगें ऊपर उठा दी और मेरे कठोर लण्ड को अपनी चूत पर दबाने लगी। मैंने अपने लण्ड को दो बार चूत पर जोर से रगड़ दिया।

…… और फिर अचानक ही मेरे होश उड़ गये। घर के बाहर कुछ लोगों के बात करने की आवाजें आने लगी। मैं और रेशमा एकदम से घबरा गये।

'हाय रे मेरे भगवान ! यह कैसी आवाज?'

सारी रंगत हमारे मुख से उड़ चुकी थी। मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा था कि यह सब कैसे हो गया और कौन आ गया । मेरे तो पसीने छूटने लगे।

'रेशमा ये कौन लोग है, अब क्या करें?' मुझे काटो तो खून नहीं।

रेशमा ने संभलते हुये कहा- कपड़े पहनो और जैसा मैं कहती हूँ, करो !

'ओह हां हां… जरूर'

मैंने जितनी देर में कपड़े पहने, उसने फ़्रिज से कोल्ड ड्रिंक और कुछ नमकीन लाकर बैठक में रख दी। मैं तुरन्त ही एक मेहमान की तरह से गिलास उठा कर नमकीन खाने लगा।

फिर वो दरवाजा खोल कर बाहर आई। बाहर दो तीन पुरुष और महिलायें खड़ी थी। रेशमा को देख कर वो पुरूष तो आगे की ओर बढ़ गये और महिलायें कुछ सामान खोल कर वहीं बैठ गई और सामान के बारे में समझाने लगी थी। वो कोई सेल्समेन वगैरह थे। उन्होंने अन्दर झांक कर मुझे बैठे हुए देखा और मुझे भी सब कुछ देखने के लिये बुलाया। मैं उस समय डरा हुआ था, अब इन सब बातों को देख कर खीज सा गया था। मैंने कुछ नहीं कहा और बाहर जाने लगा। रेशमा मुस्करा उठी।

शाम को उसके घर वाले आ गये थे। मैं अपने लण्ड को हाथों में लिये बस मसलता ही रह गया हमेशा की तरह। मेरा लण्ड कुंवारा ही रह गया। चूत की मात्र खुशबू ही मिल पाई थी मेरे लण्ड को।

मैं मजबूरी से निराश हो गया। मेरा मन तड़प उठा था। क्या मेरा यह अदना सा 6 इन्च का लण्ड कुंवारा ही रह जायेगा?

नीरव




मेरी बिगड़ी हुई चाल

मेरी बिगड़ी हुई चाल






मेरी बिगड़ी हुई चाल

लेखिका : कोमल प्रीत कौर

कोमल की कोमल चूत की तरफ से आपको नमस्ते। मैं आपको बता दूँ कि मैंने शादी के बाद अपने पति के अलावा पहली बार अपने एन आर आई बुढे आशिक से अपनी चूत चुदवाई थी।

यह घटना इस कहानी के रूप में अन्तर्वासना पर आई थी।

मेरी तंग पजामी

मेरी फिगर के बारे में भी आपको पता है कि मेरा गोरा बदन, पतली कमर, लम्बे रेशमी बाल, कसे हुए चूतड़ और मोटे चूचों को देख देख लड़के तो क्या बूढ़े भी मुठ मारने के लिए मजबूर हो जाते है। मैं शादीशुदा हूँ और मेरे पति आर्मी में हैं।

मेरा एन आर आई बुड्ढा आशिक थोड़े दिनों में ही वापिस अमेरिका जाने वाला था इसलिए उसने मुझे फिर आखरी बार मिलने के लिए कहा। अब तक मुझे भी उसके लौड़े की जरूरत महसूस हो रही थी इसलिए मैं अपने ससुराल में मायके जाने का बहाना बना कर जालन्धर अपने आशिक के पास चली गई। उसके बाद मुझे अपने मायके भी जाना था जो जालन्धर के पास ही था तो वहाँ से मुझे कोई परेशानी भी नहीं थी जाने की।

मैंने उस दिन उसी की दी हुई साड़ी पहनी थी और खूब सैक्सी लग रही थी। वो बस स्टैंड पर गाड़ी लेकर आया और घर जाते समय गाड़ी में ही मेरी जांघ पर हाथ घुमाने लगा। मैं भी मौका देख कर पैन्ट के ऊपर से ही उसके लण्ड को सहलाने लगी। बंगले में पहुँचते ही उसने मुझे गोद में उठा लिया और अन्दर ले गया।

उसने मुझे कोल्ड ड्रिंक दिया और खुद बीयर पीने लगा।

फिर उसने मुझे कहा- कोमल, तुम भी बीयर का स्वाद लेकर देखो, इसमें कोई नशा नहीं है।

पहले तो मैंने मना कर दिया मगर उसके ज्यादा जोर डालने पर मैंने थोड़ी सी बीयर ले ली।

हम दोनों सोफे पर बैठे थे और उसने वहीं पर मेरे होंठों को अपने होंठों में भर लिया। मैं भी उसका साथ देने लगी। उसने फिर एक जाम बनाया और उसमें थोड़ी सी शराब भी मिला दी। मैंने भी सोचा कि थोड़ी सी है, इससे क्या होगा, और मैंने पूरा जाम ख़त्म कर दिया।

हम दोनों आपस में लिपटे हुए थे। वो कभी मेरी चूचियों को मसल रहा था और कभी मेरी गाण्ड पर हाथ फेर रहा था। मेरी साड़ी का पल्लू भी नीचे गिर गया था और मेरे ब्लाउज में से दिख रहे गोल गोल उभारों पर अपनी जीभ रगड़ रगड़ कर चाट रहा था। मेरे मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थी। उसका लण्ड एकदम सख्त हो चुका था। मैं सोफे पर ही घोड़ी बन गई और उसके लण्ड की तरफ अपना मुँह करके उसकी पैन्ट खोल दी। उसने भी अपने चूतड़ उठा कर अपनी पैन्ट उतार दी। उसके कच्छे में उसका लण्ड पूरा तना हुआ था। मैंने उसका लण्ड बाहर निकाला और अपने हाथों में ले लिया।

वो भी मेरे लम्बे बालों में हाथ घुमाने लगा। मैंने उसके लण्ड को चूमा और फिर अपने नर्म-नर्म होंठ उस पर रख दिए। मानो जैसे मैंने किसी गरम लोहे के लठ्ठ को मुँह में ले लिया हो। मैं उसका लण्ड पूरा मुँह में ले रही थी। लप-लप की आवाजें मेरे मुँह से निकल कर से कमरे में गूंज रहीं थी।

वो भी मेरे सर को ऊपर से दबा दबा कर और अपनी गाण्ड उठा उठा कर अपना लण्ड मेरे मुँह में ठूँस रहा था। उसके मुँह से भी आह आह की आवाजें निकल रही थी।

वो बोला- चूस ले रानी ! और चूस ! बहुत मज़ा आ रहा है।

मैंने कहा- क्यों नहीं राजा ! आज मैं रस पीने और पिलाने ही तो आई हूँ।

फिर उसने मेरे बालों को मेरे चेहरे पर बिखेर दिया और मुझे बाहर कुछ भी नहीं दिख रहा था। सिर्फ मेरे सामने उसका लण्ड था। एक तरफ उसका पेट और दूसरी तरफ मेरे काले घने बाल थे। मैं उसका लण्ड लगातार चूसे जा रही थी। फिर उसने मेरी पीठ पर से मेरा ब्लाउज खोल दिया और दूर फेंक दिया। फिर मेरी ब्रा का हुक भी खोल दिया, जिसके खुलते ही मेरे दो बड़े बड़े कबूतर उसकी टांग पर जा गिरे और उसने भी अपना हाथ मेरे दोनों कबूतरों पर रख दिए। वो मेरी और सीधा हो कर बैठ गया और मेरे चूचों को जोर जोर से मसलना चालू कर दिया।

उसका हाथ कभी मेरे स्तनों पर, कभी मेरी पीठ पर और कभी मेरी गाण्ड पर चल रहा था। फिर उसने मेरी साड़ी उतार कर मेरा पेटीकोट खोल दिया। मैंने भी एक हाथ से उसको निकाल दिया और एक तरफ फ़ेंक दिया। अब मेरे बदन पर एक पेंटी ही बची थी उसने उसको भी उतार दिया। मगर मेरी पेंटी उतारते समय वो जरा सा भी आगे नहीं हुआ। मैं हैरान थी कि उसने मेरी पेंटी मेरी गाण्ड से बिना हिले कैसे नीचे कर दी।

अभी मैं सोच ही रही थी की मेरी पेंटी जो अभी जांघों पर थी, में दो उंगलियाँ घुसी और मेरी पेंटी और नीचे जाने लगी और मेरे घुटनों पर आकर रुक गई। मुझे लगा कि जैसे किसी और ने मेरी पेंटी उतारी हो।

मैंने झटके से सर को उठाया और पीछे मूड़ कर देखा तो मैं हैरान रह गई। वहाँ पर एक और बुड्ढा कच्छे और बनियान में खड़ा था।

मैंने फिर अपने आशिक की तरफ देखा तो वो बोला- जाने मन... सॉरी, मैंने तुम्हें अपने इस दोस्त के बारे में बताया नहीं। दरअसल यह कल से मेरे घर में है और आज जब सुबह तूने मुझे बताया कि तुम मुझसे मिलने आ रही हो तो मैंने इसे भेजने की कोशिश की मगर शायद इसने हमारी बातें सुन ली थी इसलिए यह मुझसे बोला कि एक बार इसे भी चूत दिला दूँ, काफी अरसे से चूत नहीं मारी। मुझे इस पर तरस आ गया।

उसने कहा- जान, मैं तुम्हें रास्ते में ही इसके बारे में बताने वाला था मगर डर गया कि कहीं तुम रूठ कर वापिस न चली जाओ, इसलिए घर आकर सोचा कि पहले मैं तुमसे मज़े कर लूँ फिर इसके बारे में बताऊँगा, मगर यह साला अभी आ गया।

मैं अभी कुछ बोली नहीं थी कि वो दूसरा बुड्ढा बोल पड़ा- यार क्या करता? इसकी मस्त गाण्ड देख कर मुझसे रहा नहीं गया।

वो दोनों अब मेरे मुँह की तरफ देख रहे थे कि मैं क्या जवाब देती हूँ। मगर मैंने जो शराब पी थी उसका नशा मुझ पर चढ़ने लगा था और फिर अगर मैं उस वक्त मना भी करती तो फिर भी वो दोनों मुझे नहीं छोड़ते और मुझे जबरदस्ती ही चोद लेते। मैंने उस दूसरे बूढ़े की ओर देखा। उसकी सेहत भी कोई खास नहीं लग रही थी। मैंने सोचा कि इसका लण्ड या तो खड़ा ही नहीं होगा या फिर दो मिनट से ज्यादा नहीं टिकेगा।

इसलिए मैंने कहा- कोई बात नहीं, मुझे तुम दोनों इक्कठे ही मजा दो। मैं तुम दोनों को आज खुश कर दूंगी।

वैसे भी अगर मैं उनकी बात नहीं मानती तो मेरी चूत भी प्यासी रह जाती जो मुझे कभी गंवारा नहीं था।

मेरी बात सुनते ही वो दोनों फिर से मुझ पर टूट पड़े। एक ने मेरे वक्ष को और दूसरा मेरी पेंटी उतार कर (जो अभी तक घुटनों पर ही थी) मेरी गाण्ड को सहलाने लगा। मैं भी अपना काम चालू रखते हुए फिर से लण्ड को सहलाने लगी। हमारी बातचीत में लण्ड थोड़ा ढीला हो गया था जो फिर से जोश में आ रहा था।

थोड़ी ही देर में मुझे दोनों लण्ड पूरे तने हुए महसूस होने लगे। एक मेरी जांघों पर और दूसरा मेरे मुँह में था। अब मुझे दूसरे बूढ़े का लण्ड देखने की इच्छा होने लगी। जिसे मैंने सोचा था कि खड़ा ही नहीं होगा। तभी पहले वाले लण्ड में हलचल होने लगी और वो बुड्ढा जल्दी जल्दी मेरे मुँह को चोदने लगा। मैं भी जोर जोर से उसके लण्ड को अपने हाथों और मुँह में लेने लगी। फिर उसका भरपूर माल मेरे मुँह में था। मैं उसको चाट गई।

उधर दूसरा बुड्ढा जो मेरी चूत और गाण्ड को चाट रहा था, ने भी अपनी जुबान का कमाल दिखाया और मेरी चूत में से पानी निकल गया। मेरी चूत में से निकल रहे पानी को वो चाट रहा था। इससे मुझे कुछ थकावट महसूस हुई और मैं सोफे पर ठीक से बैठ गई। एक लण्ड तो ढीला हो गया था मगर दूसरे में अभी दम था। वो बुड्ढा अपना नंगा लण्ड मेरे मुँह के सामने ले कर खड़ा हो गया। उसका लण्ड मैं सोच रही थी कि ज्यादा बड़ा नहीं होगा मगर सात इन्च का लण्ड देख कर मैं हैरान रह गई। बूढ़े की सेहत कमजोर थी मगर उसके लण्ड की नहीं।

मैंने अभी उसका लण्ड हाथ में पकड़ा ही था कि मेरे सामने एक और जाम लेकर वो पहले वाला बुड्ढा खड़ा था। मैंने भी बिना सोचे समझे जाम हाथ में ले लिया। मैं जानती थी कि इसमें भी शराब है। मगर पता नहीं मुझे नशा हो रहा था। मैंने उस बूढ़े का लण्ड जाम में डुबो दिया और फिर बाहर निकाल कर उसे चाटने लगी। मैं बार बार ऐसे कर रही थी और बूढ़े का लण्ड और भी बड़ा होता लग रहा था। फिर मैंने एक ही घूंट में पूरा जाम ख़त्म कर दिया।

बूढ़े ने मुझे अपनी गोद में उठाना चाहा, वो शायद मुझे बेडरूम में उठा कर ले जाना चाहता था। उसने मुझे अपनी बाँहों में उठा तो लिया मगर उसे चलने में परेशानी हो रही थी। तभी पहले वाला बुड्ढा भी आ गया और बोला- यार, संभल के ! बहुत कोमल माल है, कहीं गिर ना जाए।

फिर उन दोनों ने मिलकर मुझे अपनी बाँहों में उठा लिया, बेडरूम में ले गये और मुझे बैड पर लिटा दिया।

मैंने दोनों लण्डों की तरफ देखा। एक लण्ड अभी भी ढीला था और दूसरा अभी पूरा कड़क। दूसरे बूढ़े ने मेरा सर पकड़ा और अपनी तरफ कर लिया। मेरा पूरा बदन बेड पर था मगर मेरा सर बैड से नीचे गिर रहा था मगर मेरा मुँह ऊपर की तरफ था। मेरे मुँह के ऊपर बूढ़े का लण्ड तना हुआ था। मुझे पता था कि अब क्या करना है। बूढ़े ने अपना लण्ड मेरे चेहरे पर घुमाते हुए मेरे होंठों पर रख दिया। मैं भी अपने होंठों से उसको चूमने लगी और अपने होंठ खोल दिया। बुड्ढा भी समझदार था। उसने एक हाथ से मेरे सर को सहारा दिया और अपना लण्ड मेरे होंठों में ऐसे घुसा दिया और फिर अन्दर-बाहर करने लगा जैसे किसी गोल खुली हुई चूत में लण्ड घुसाते हैं। फिर उसने मेरे सर को छोड़ कर मेरे दोनों स्तनों को अपने हाथों में भर लिया। मेरा सर लटक रहा था और उस पर बूढ़े के लण्ड के धक्के, उसके दोनों हाथ मेरे उरोजों को मसल रहे थे।

अब दूसरा बुड्ढा भी बैड पर आ गया और मेरी टाँगे खोल कर मेरी चूत पर अपना मुँह रख दिया। वो मेरी चूत के ऊपर बीयर डाल रहा था और फिर उसे चाट रहा था। कभी कभी वो मेरे पेट पर मेरी नाभि में भी बीयर डाल कर उसे चाटता। उसकी जुबान जब मेरी चूत के अन्दर जाती तो मचल कर मैं अपनी गाण्ड ऊपर को उठाती मगर ऐसा करने से मेरे मुँह में घुस रहा लण्ड और आगे मेरे गले तक उतर जाता।

फिर उन दोनों ने मुझे पकड़ कर बैड पर ठीक तरह से लिटा दिया। अब दूसरा लण्ड भी कड़क हो चुका था और पहले वाला तो पहले से ही कड़क था।

अब मेरी चूत की बारी थी चुदने की। मैं बैड पर अभी ठीक से बैठ ही रही थी कि वो सेहत से कमजोर बुड्ढा मुझ पर टूट पड़ा और मुझे नीचे लिटा कर खुद मेरे ऊपर आ गया। मेरी चूत तो पहले से लण्ड के लिए बेकरार हो रही थी। इस लिए मैंने भी अपनी टाँगें ऊपर उठाई और उसने अपना लण्ड मेरी चूत के मुँह पर रख कर धक्का मारा। उसका लण्ड मेरी चूत की दीवारों को चीरता हुआ आधा घुस गया। मैं इस धक्के से थोड़ी घबरा गई और अपने आप को सँभालने लगी। मगर फिर दूसरा धक्का में पूरा लण्ड मेरी चूत के बीचोंबीच सुरंग बनाता हुआ अन्दर तक घुस गया।

मुझे लगा जैसे मेरी चूत फट जायेगी।

मेरे मुँह से निकला- अबे साले, मेरी फाड़ डालेगा क्या… आराम से डाल ! मैं कहीं भाग तो नहीं रही !

वो बोला- अरे रानी… तेरी जैसी मस्त भोसड़ी देख कर सब्र नहीं होता… दिल करता है कि सारा दिन तुझे चोदता रहूँ।

मैं बोली- क्या लण्ड में इतना दम है कि सारा दिन मुझे चोद सके?

इस बात से वो गुस्से में बोला- वो तो साली अभी पता चल जाएगा तुझे…

और मुझे और जोर से चोदने लगा।

मुझमें भी आग थी। मैं भी उसका साथ कमर हिला-हिला कर दे रही थी। आखिर मेरा माल छुटने लगा और मैं उसके सामने निढाल हो कर पड़ गई मगर वो अभी भी मुझे रोंदे जा रहा था, मेरी चूत से फच-फच की आवाजें तेज हो गई थी। मैं उसके नीचे मरे जा रही थी।

तभी दूसरा बुड्ढा आया और उसको बोला- चल, अब मुझे भी कुछ करने दे।

मैं भी बोली- अरे अब बस कर ! तू तो सच में मुझे मार डालेगा... पता नहीं तेरा लण्ड है या डंडा?

वो बोला- साली, अभी तो तुझे मैं और चोदूँगा... तुझे बताऊँगा कि मुझमें कितना दम है।

फिर दूसरा बुड्ढा बिस्तर पर लेट गया और बोला-चल, मेरे लण्ड पर बैठ जा !

मैंने वैसे ही किया। उसका लण्ड पूरा डंडे जैसा खड़ा था। मैं उस पर बैठ गई और उसका लण्ड मेरी गीली चूत में आराम से घुस गया। मैं उसका लण्ड मजे से ऊपर नीचे होकर अन्दर बाहर कर रही थी।

वो मेरे नीचे बोला- आह... आह रानी... बहुत मजा आ रहा है... प्यार से मुझसे चुदती जा.... मैं भी तुझे प्यार से चोदूँगा।

वो मेरी छाती पर हाथ घुमाता हुआ बोला- ये अपने मम्मे मेरे मुँह में डाल दे रानी।

मैंने भी अपनी एक चूची उसके मुँह पर रख दी जिससे मेरी गाण्ड पीछे खड़े बूढ़े के सामने आ गई और वो मेरी गाण्ड में उंगली घुसाने लगा।

उसकी इस हरकत से मुझे भी मजा आया मगर मैंने यूँ ही उसको कहा- बूढ़े... अब भी पंगे लिए जा रहा है... तूने पहले अपने दिल की कर तो ली है मेरे साथ।

तो वो बोला- अभी कहाँ की है... अभी तो मेरा माल भी नहीं निकला है !

और वो मेरी गाण्ड में तेजी से उंगली अन्दर-बाहर करने लगा।

मैं सिसक-सिसक कर दोनों छेदों की चुदाई का मजा ले रही थी। मगर अब जो होने वाला था वो मेरे लिए सहन करना नामुमकिन था।

पीछे वाले बूढ़े ने मेरी गाण्ड पर कोई क्रीम लगाई और अपने लण्ड का सुपारा मेरी गाण्ड में घुसेड़ दिया। मेरी जैसे गाण्ड ही फट गई हो। एक लण्ड मेरी चूत में था और दूसरा मेरी गाण्ड में जाने वाला था।

मैं दोनों बुड्डों के बीच में फंसी हुई चिल्ला रही थी- अरे मादरचोद छोड़ दे मुझे... तुम दोनों मुझे मार डालोगे।

मगर उन पर जैसे मेरी बातों का कोई असर नहीं हो रहा था। दोनों ही अपना अपना लण्ड अन्दर घुसेड़ रहे थे।

पीछे वाला बुड्ढा तो मुझे गाली दे दे कर चोद रहा था और नीचे वाला भी मुझे बोल रहा था- बस रानी, थोड़ी देर में सब ठीक हो जाएगा।

और वैसे ही हुआ, थोड़ी देर में मैं दोनों छेदों से मजे लेने लगी। मैं अपनी गाण्ड और चूत धक्के मार-मार कर चुदवा रही थी।

फिर ऊपर वाले बूढ़े ने मेरी गाण्ड में अपना माल निकल दिया। गाण्ड में गर्म-गर्म माल जाते ही मुझे और सुख मिलने लगा। अब मैं भी फिर से छुटने वाली थी। मैं जोर जोर से धक्के मारने लगी और मेरा पानी नीचे वाले बूढ़े के लण्ड पर बहने लगा। उसने मेरी चूत में से लण्ड निकाला और मुझे घोड़ी बना लिया और फिर उसने मेरी गाण्ड में लण्ड पेल दिया।

मैं भी घोड़ी बन कर अपनी गाण्ड के चुदने का मजा ले रही थी। वो मुझे जोर जोर से धक्के मार रहा था। पर अब मेरी गाण्ड का मुँह खुल चुका था और मुझे कोई तकलीफ नहीं हो रही थी। फिर जब

उसका भी छूटने लगा तो उसने अपना लण्ड बाहर निकाल कर मेरे वक्ष पर वीर्य की बौछार कर दी। मैं भी उसका लण्ड जीभ से चाटने लगी।

शाम तक मैं वहाँ पर चुदती रही और फिर वो दोनों मुझे गाड़ी में बिठा कर मेरे मायके गाँव छोड़ने आये। उन्होंने मुझे गाँव से पीछे ही उतार दिया और वहाँ से मैं पैदल अपने घर चली गई। मगर मुझसे ठीक से चला भी नहीं जा रहा था।

मेरी गाण्ड और चूत का बुरा हाल हो रहा था, मेरी बिगड़ी हुई चाल देख कर मुझे मेरी भाभी ने पूछा भी था- क्या बात है...?

तो मैंने कहा- बस से उतरते समय पैर में मोच आ गई थी।

फिर मैं चुपचाप बिस्तर पर लेट गई। तब जाकर कहीं मेरी चूत और गाण्ड को कुछ राहत मिलने लगी।

दोस्तो, आपको मेरी यह कहानी जरूर पसंद आई होगी... मुझे मेल करके जरुर बताना...

अगली बार एक और मस्त किस्से के साथ आपके सामने पेश हो जाऊँगी... तब तक के लिए आप सभी के लण्डों पर प्यार भर चुम्बन... आपकी भाभी कोमल
bhabi_sexy84@yahoo.com

मेरे मित्र राज ने मेरी इस कहानी को आप तक लाने में बहुत मदद की है... उनको भी मेल करके जरूर बताना।

sharmarajesh96@gmail.com



Tuesday, February 21, 2012

सोने का नाटक

प्रेषक : सुनील सिंह

मैं अपनी पहली कहानी लिख रहा हूँ, उम्मीद है आप सब को पसंद आएगी।




मेरा नाम सुनील है, मैं कोलकाता में रहता हूँ, उम्र 28 की है और मैं किराए के घर में अकेला रहता हूँ। बात उन दिनों की है जब मैं 24 साल का था और हमारी काम वाली जिसकी उम्र 34 की थी और बदनाकार 36-30-38 था, हमारे यहाँ काम करती थी। मैं उसके मस्त सेक्सी बदन को देख देख कर उसके बारे सोच सोच कर रोज अपने लंड से घंटों खेला करता था। वो जब घर पर झाड़ू लगाने लगती, तो मैं बातों-बातों में उसके जिस्म को निहारता रहता था और मेरा लंड फूल कर 7" का हो जाता था और पैंट से बाहर आने को बेक़रार रहता था, जिसे देख कर वो मुस्कुराती थी।

एक दिन मैंने ठान लिया कि जैसे भी करके मैं उसकी बूर चोदूँगा और फिर गांड भी मारूँगा। उस दिन से मैंने योजना बनानी शुरु की। वो सुबह काम पर 6.30 बजे आती थी, तो एक दिन मैं सुबह जल्दी उठ गया, बदन से सारे कपड़े उतार दिए, अपने घर के दरवाजे की कुण्डी खोल कर वापस अपने बिस्तर पर जाकर उसके आने का इन्तजार करने लगा और अपने लंड पर थूक लगा कर उसके साथ प्यार से उसके जिस्म के बारे सोच कर खेलने लग गया।

खेलते खेलते मेरा लंड का सुपारा फूल कर लाल हो गया और मेरा लंड पूरा 7" से भी ज्यादा हो गया। इतने में उसकी आने की आवाज सुनाई दी तो मैं चुपचाप लेट गया। वो दरवाजे पर दस्तक देने लगी तो उसे लगा कि दरवाजा तो खुला है, तो वो अन्दर आकर दरवाजा बंद कर रसोई की तरफ चल पड़ी। कमरे में अंधेरा होने के कारण वो मुझे देख नहीं पा रही थी और ख्याल भी नहीं किया।

उसने झाड़ू उठा कर मेरे कमरे की बत्ती जलाई तो देखा कि मैं पूरी तरह से नंगा हूँ और लंड पूरी तरह से खड़ा था।

उसे देख कर उसके मुँह से इस्स सस्स्स्स की आवाज निकल गई।

पर मैंने सोने का नाटक जारी रखा। वो मुझे नींद में देख कर मेरे पास आकर बैठ गई और गौर से मेरे लण्ड को निहारती रही, कुछ देर देखने का बाद उसे मस्ती सूझी और वो खुद में बड़बड़ाने लगी- हाय, कितना बड़ा है !

मेरे 7" के खड़े लण्ड को देख कर उसकी बूर में खुजली शुरु हो चुकी थी, उसने अपना मुँह मेरे लण्ड के लाल सुपारे के ऊपर ले जाकर अपनी थूक छोड़ी तो लण्ड पूरी तरह से उसके थूक से भीग गया और पहले से भी ज्यादा चिकना और तन कर खड़ा हो गया।

मैं चुपचाप सोने का नाटक करते हुए मजा ले रहा था। पर उससे रहा नहीं गया और उसने मेरे लंड के सुपारे को जो लाल हो चुका था और हल्का सा रस भी टपका रहा था, उस पर आहिस्ता से अपनी जीभ फेरना शुरु किया। मुझसे तो रहा नहीं जा रहा था पर फिर भी मैंने चुपचाप अपनी आँखें बंद रखी।

वो शायद समझ चुकी थी कि मैं सोने का नाटक कर रहा हूँ, इसलिए उसने बिना कुछ सोचे मेरे लण्ड को अपना मुँह में लिया और प्यार से चूसना चालू कर दिया। उसकी सांसें जोर से चल रही थी और वो पूरे होश खोकर मेरे लण्ड को अपनी मुँह में ले चूसे जा रही थी।

और कुछ एक मिनट बाद उसने मुझे पुकारा- सुनील, अब उठ भी जाओ, मैं जान चुकी हूँ कि तुम सोने का नाटक कर रहे हो !

यह सुन कर मैं उठ गया और उसे अपने बाँहों में भर चूमने लगा। फिर मैंने कहा- मेरी रानी, अपने कपड़े तो उतारो !

उसने कहा- तुम ही उतार दो !

मैंने झट से उसके कपरे उतारने शुरु किए और उसे पूरी तरह नंगा कर दिया। उसका नंगा बदन देख कर मेरे मुँह में पानी आ गया क्योंकि उसकी चूचियाँ और चुचूक पूरे तने हुए थे और बुर पर काली झांटें भी थी।

मैं कुछ सोचे बिना उसके चुचूक अपने मुँह में लेकर एक बच्चे की तरह चूसने लगा और वह कहती रही- राजा पी ले स्स्स्सस्स्स्स .... म्मम्मम .. और पी ! और पी .. ख़त्म कर दे सारा दूध .. बहुत दिन से भरी पड़ी हैं ये ! हअइ रअजअ ससससस..मइनइ अअकहइ हओओओ !

मैं उसकी बुर में ऊँगली करने लगा, 2-3 मिनट बाद मैंने उठ कर उसे 69 की अवस्था में ले कर अपने ऊपर चढ़ा लिया और प्यार से उसकी बुर चाटने लगा।

उसने कहा- हय राजा चाटते रहो, म्मम्म ... अअअहहहहह ... रुकना मत चाटते रहो !

कह कर मेरे लण्ड अपने मुँह में ले चूसने लगी। पूरा घर चप -चुप -उप्प्प की आवाज़ से भर गया।

एक ही मिनट बाद मेरे लण्ड ने पूरा रस उसके मुँह में छोड़ दिया और वो उसे चाट चाट कर गटकने लगी, साथ ही वो भी मेरे मुँह पर झड गई और मैं भी उसकी बुर का पानी बड़े मजे के साथ चाटने लगा और पूरी बुर अपनी जीभ से साफ़ कर डाली।

हम दोनों बिस्तर पर लेट गए..... पूरी रात न सोने के कारण मैं चुपचाप लेटे-लेटे सो गया।

और उसके बाद की कहानी मैं दूसरे भाग में लिखूँगा।

मुझे मेल करें ...




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